कविता

शीर्षक: वक्त लगता है।

वक्त लगता है, जिंदगी को समझने में,
वक्त लगा है, ख़ुद को समझने में,
वक्त लगता है, लोगों को समझने में,
वक्त लगता है, अपनों को समझने में,
वक्त लगता है, परिवार को समझने में,
वक्त लगा है, किसी को अपना बनाने में,
वक्त लगता है, रिश्तों को समझने में,
वक्त लगता है, बुराई के पीछे अच्छाई को समझने में,
वक्त लगता है, खुशियों के पीछे दुःख को समझने में,
वक्त लगता है, तारीफों के पीछे मतलब को समझने में
वक्त लगता है, टूटे हुए को फिर से  संभलने में,
वक्त लगता है, ज़िंदगी को जिंदगी बनाने में।
वक्त लगता है, बगिया में  फूल खिलने में,
वक्त लगता है, किसी की ज़िंदगी में,
ख़ुद की अहमियत को समझने में,
वक्त लगता है, हर परिस्थिति में ख़ुद को  खुश रखने में।
लेखक: प्रभु कुशवाहा ✍🏻





#hindipoem

#hindikavita

@writerprabhu108

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started