Hindi Poem

शीर्षक: अपने से लड़ नही सकते।

अपनों से लड़ नहीं सकते,
इसलिए हारना पसंद करता हूं।

दर्द कितना भी हो सीने में,
मुस्कुराना पसंद करता हूं।

खुश होते होंगे लोग,
दूसरों को दुःख देकर,
मैं खुद की खुशियां बांट
दिया करता हूं।

चलाते होंगे लोग,
रोब कमजोर लोगों पर,
आँखें दिखाते होंगे,
असहाय लोगों पर,
हम तो  प्यार बांटा करते हैं।

भूल जाते हैं लोग ,
आपकी  सारी अच्छाइयों को,
एक गलती हो जाने पर,
हम तो माफ़ कर दिया करते हैं।

वो जो मन में बसते हैं हमेशा, अपने
करते हैं मीठे बातें, और वादे,
एक कड़वी बोल को,
सहन नहीं कर पाते,
हम तो जाने देते हैं।

अपने से लड़ नहीं सकते,
इसलिए हारना पसंद करता हूं।

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