धीरे-धीरे से खत्म हो रहा है,
रिश्तों से अपनापन,
प्रेम से विश्वास,
संस्कार से रिवाज़,
स्नेह से ममता,
बोली से मधुरता,
दुनियां से मोह,
लोगों से भरोसा,
त्योहारों से उत्साह,
फलों से मिठास,
पकवानों से स्वाद,
आंखें से आंसु,
फूलों से महक,
धीरे धीरे से खत्म हो रहा है।